घड़ी
बस ऐसे ही ....कुछ घड़ी कलाई में बांध कर तो अच्छा लगा लगा ...जैसे कुछ साथ आ गया है दिन में चार बार छः बार नज़र पड़ ही रही है .. पता लग जाता है सुबह कब जगा कब खाया .... अंततः ...कब सोया घड़ी थोड़ी एडवांस है ... मेरे सोने ..जागने ...चलने पर भी नज़र रखती है मेरे दिल की धड़कने भी गिनती रहती है कभी कम ज्यादा हुआ तो बता भी देती है अच्छा है की मुझे इसका ख्याल 10 दिन में सिर्फ एक बार ही रखना है और उसके बदले ये 240 घंटे मुझ पर नजर रखती है ..... अच्छा है घड़ी नब्ज के हिसाब से चलती है नब्ज घड़ी के हिसाब से नहीं .. #आमोद बिंदौरी