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एक असंतुलित इंसान हूँ

मैं एक असन्तुलित बिचार रखने वाला मानसिक उथल पुथल में पलता सामाजिक एक इंसान हूँ..... वही हड्डी वही खाल से ढका पंच तत्व निर्मित उन्ही ज्ञानेंद्रियों कर्मेन्द्रियों में चलि...

है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है

है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है । 1212-1122-1212-22 मेरे खयाल में अब फासलों से आती है।। तुम्हारी याद भी अब दूसरों से आती है।। कदम रुके हैं मुहब्बत की राह में जबसे। है सच के नींद बड़ी मुश...

पर है कोशिस उड़ूँ कुतरे पर में

बस है कोशिस उड़ूँ कुतरे पर में।। बह्र - 2122-1221-22 इतना उलझा है आदम बसर में।। खुद से पूछे वो है किस सफर में ।। क्या समझ पाएगे रात भर में।। फर्क है इस नजर उस नजर में।। ना बदल पाऊं बिलकुल न ब...

हाइकु

कह दो आप अपना या पराया आपकी मर्जी ..१ एक कोशिश जोड़ पाऊ सायद मैं टूटे दिल--२ आमोद बिन्दौरी