अपने दुख को स्वयं निमंत्रण देता हूं
अपने दुख को स्वयं निमंत्रण देता हूं। मै पथ को फिर शूल आमंत्रण देता हूं। पीड़ाओं की पुनरावृतियां होने से विपदाओं की आवृत्तियां होने से साहस, धैर्य की खुद ही परीक्षा लेता हूं। अपने दुःख को स्वयं निमंत्रण देता हूं ...1 कमसिन आंखों वाली गोरी से हो जाए फिर इश्क अफीमी छोरी से मुझमें हो वो मादक महुए के जैसी फिर बिरहा मझधारों ,नइया खेता हूं अपने दुःख को स्वयं निमंत्रण देता हूं...2 दोस्त–दोस्त का खेल नहीं अच्छा होता दोस्त हो दुश्मन खेल वही अच्छा होता सारे अपने राज खुला कर देता हूं। अपने दुःख को स्वयं निमंत्रण देता हूं...3 मुझको अति विश्वास मेरे संघर्षों पर छैनी के सिर चोंट किए हथौड़ों पर मै उसको फिर पूर्ण स्वतंत्रता देता हूं अपने दुःख को स्वयं निमंत्रण देता हूं...4 आमोद बिंदौरी