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जीवन की उलझनों से कोई रास्ता नहीं

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यूं अर्श ए जिंदगी से मेरा वास्ता नहीं । सब आप की इनायत मुझको गिला नहीं । जो भी दिखाया आपने अपनी निगाह से । हां सारा शहर देख लिया देखता नहीं ।। बेदम हुए हैं लोग यहां बात बात पर । जीवन की उलझनों से कोई रास्ता नहीं ।। इतना डराए वक्त की जुल्मी हवा मुझे । इक सच ये जिंदगी से मुसलसल मिला नहीं ।। आवाज दूर तक न सही ..आ रही तो है । सूखे हुए हलक से कोई कभी चीखता नहीं ।। देखा इमारतों के अलीशा दीवार ओ दर। कहते हैं मुझे रोक यही बा वफ़ा नहीं ।। किसकी सुनूं आमोद, किसे भूल जाऊं मैं। है अल्प ज्ञान मुझमें, युँ मै देवता नहीं ।। आमोद बिंदौरी

ऐ पालक, प्रिए,संगनी, पथ प्रदर्शक

ऐ पालक , प्रिए, संगनी,पथ प्रदर्शक  नमन हां तुम्हे है, नमन हां तुम्हे है। विदा हो चली पंच तत्वों की माया नदी में प्रवाहित हुई अस्थि काया हवा हो चुके  धुआं और बचे कण  हैं अवशेष कुछ हो रहा उनका चिंतन उनकी वो भोली सरलता वो ममता  भुलाए नहीं स्वाद उनका है घटता  जीवन सफर पर चलीं साथ थी वो यूं आंखों में मेरे इक विश्वास थी वो था बीहड़ , अधूरा , अस्तित्व के बिन  मिला साथ निरखता रहा मै पल छिन स्मृति में मेरी मुस्कुराती महकती बाते हैं जैसे अभी आज कल की  कोने कोने चमकती रहेगी यूं सीरत  ऐ संघर्ष की छांव ममता की मूरत  ऐ पालक , प्रिए, संगनी,पथ प्रदर्शक  नमन हां तुम्हे है, नमन हां तुम्हे है। आमोद बिंदौरी ....  स्मृति शेष  श्रद्धांजलि