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घर के सपनें सजों अधभरा ठीक हूँ..गजल

बह्र-212-212-212-212 घर पे अपने बुरा या भला ठीक हूँ।। गुम शु दा हूँ अगर गुम शु दा ठीक हूँ।। पर्त धू की चढ़ी,दीमकों का बसर। हो लगी चाहे सीलन पता ठीक हूँ।। मेरा लहजा है कोई कहे न कहे। मैं रदीफ़ ...

एक आँधी

एक आँधी एक आँधी गुजर रही है मेरे अंदर से इसने विध्वंस मचा रक्खा है मेरे जीवन के उपवन से मेरे मजबूत रिश्तों को हिला डाला है । कमजोर डालियों को तोड़ा  रही है और मेरे नव अहसास के ...

खुशबुएँ ज़ेहनी अभी भी कर रहे गुलजार क्यों??

खुशबुएँ ज़ेहनी अभी भी कर रहे गुलजार क्यों?? 2122-2122-2122-212 आप को जाना ही है तो आज कल इतवार क्यों। तोडना गर दिल ही है तो प्यार और मनुहार क्यों।। आप की नजरें बयाँ करती, बहाना है नया । आप की इन भ...