एक आँधी
एक आँधी
एक आँधी गुजर रही है
मेरे अंदर से
इसने विध्वंस मचा रक्खा है
मेरे जीवन के उपवन से
मेरे मजबूत रिश्तों को हिला डाला है ।
कमजोर डालियों को तोड़ा रही है
और मेरे नव अहसास के
सु-कोमल से पौधों को कुचल रही है
इसका आना ....मेरे विश्वास का एक छलावा है
अब मेरे उपवन में ये नव कोपल नहीं जन्मेगी
इसके गुजरने के बाद सायद मैं पहले जैसा न रह पाउँगा
मुझे ये जीवन उपवन फिर से हँसता हुआ
महकता हुआ चाहिए
मुझे फिर एक धैर्य का जल छिड़कना है
विस्वास की खाद डालनी है ।
और अतीत का खर पतवार हटाना है ।
मुझे फिर कुछ स्नेह की सुकोमल पौध रोपनी है
मुझे इस आँधी से संघर्ष करना है
बिना थके ,बिना रुके
जीवन संघर्ष .....लगातार
आमोद बिन्दौरी
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