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मेरे गांव के बग्गड़ दादा

लपक लपक के गीत गाते गवैयों में जोश भरते चाहे वो कीर्तन हो या फिर फागुन की फ़ाग तरह तरह से माहिर हो तुम मेरे गांव की जान हो फ़िल्मी तान दे नव युवको के दिलो को लूट लेते हो ...... हाँ ब...

समर्पण

लघु कथा -समर्पण पौधे ने बहती नदी को देखा तो बुजुर्ग बृक्ष से पुंछ _ "दादा ये जल इतनी तेज गति से कहाँ बहा जा रहा है।" बृक्ष ने जवाब दिया:_ ये धारा सागर से मिलाने को व्यकुल है । पौधे न...

हे ज्ञान

हे ! ज्ञान अब तू ही कुछ कर..... दिखा कोई राह ... उंगली थम मेरी / बचपन में मेरी माँ की तरह / और मुझे चलना सिख दे ! वो  डाल दे मोह फ़ाश/  माँ के जैसा /जब परेशां हु  दोड़ता हुआ तेरी गोद में  आ जाऊ तू ...