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जिन्दगी फिर बुने हसीं सफ़हे

बूंद  स्याही को छू कलम चहके।। जिन्दगी फिर बुने हसीं सफ़हे।।(pages)   काश छंट जाए  रात ये नागिन। सुबहो सारा फलक सजे संवरे।। इश्क का  रख यकीं ज'हन यूँ  कुछ।  गर मिले आँख,आँख न झपके।। कौन डालेगा' जिन्दगी भर यूँ । बेवजह बात बात पे परदे ।। सुन रही हो न घर की दीवारों । कुछ करो ऐसा के ये घर महके।। मौलिक / अप्रकाशित  आमोद बिन्दौरी , फतेहपुर- उत्तर प्रदेश

दूर जब हो गे गम रुलायेगे

क्या गुलाबों सा' मुस्कुरायेंगे ।। दूर  जब होगे' गम रुलायेंगे ।। होगी तस्वीरें' तेरी यादों की। रख के सीने में पास पायेंगे ।। इस अमावस की रात लम्बी है। कुछ कहो कैसे' दिन बितायेंगे।। तेरी' खुश्बू  तेरी अदा  हाए!! हम  खयालों में मर ही' जायेंगे।। हांथ रख लब में चुप न कर हमको। तेरे' बिन सच है रह न पायेंगे।।  मौलिक/ अप्रकाशित आमोद बिन्दौरी, फतेहपुर - उत्तर प्रदेश

दोस्ती का खयाल आया था

दौर ने खास कुछ सिखाया था।। दोस्ती का खयाल आया था।। दरमियाँ इश्क की लड़ी  नाजुक। मै नहीं तोड़  जिसको पाया था।। प्यार के दस्तखत मिटा न सका । इसकदर दिल में वो समाया था।। आखें आंखों  से बात करती'र'ही।। भर के मीना जिन्हें  सजाया  था।। लब से खामोश तन से बे-सुध वो।। लौट कर दस्तरस में आया था ।। मौलिक / अप्रकाशित  आमोद बिन्दौरी , फतेहपुर- उत्तर प्रदेश

भीड़ थी खूब और धक्का था

याद के साथ साथ तन्हा था ।। भीड़ थी खूब और धक्का था।। कैसे खुद को सँभाल पाते हम । दिल हमारा तो एक बच्चा था ।। खाली हाँथो  ही लौट आए वो। चहरा' जिसका जनाब सच्चा था।। वक्त का साथ कब निभा पाया। वक्त का साथ एक सौदा था ।। घर की हर ईट  ईट सीलन पर । पूछता फिर भी हाल कैसा था।। याद आई है' आज फिर उनको। जिनका कहना की' गाँव मैला था ।। मुफलिशों के घरों को' भर दूँगा । राजनीतिक मजाक अच्छा था ।। मौलिक/ अप्रकाशित  आमोद बिन्दौरी , फतेहपुर- उत्तर प्रदेश

मेरी गल्तियों को ,छमा कीजियेगा।।

मेरी गल्तियों को ,छमा कीजियेगा।। पिता तुल्य हैं प्रभु,दया कीजियेगा।। हुँ नादान अरु  अल्प ज्ञानी अधम मैं। हृदय से मेरे प्रभु  रमा  कीजियेगा।। सकल ज्ञान तुम से, सकल सृष्टि तुम से। हे करुणा के सागर दया कीजियेगा ।।  हे निर्वाण  रुपम, दिगांतर,कलान्तर। हे लक्ष्माधिपति  ना मना  कीजियेगा।। है हरि नाम साधन, करे पार भव जो। द्ववादश  मन्ही मन जपा कीजियेगा।। आमोद बिन्दौरी