भीड़ थी खूब और धक्का था
याद के साथ साथ तन्हा था ।।
भीड़ थी खूब और धक्का था।।
कैसे खुद को सँभाल पाते हम ।
दिल हमारा तो एक बच्चा था ।।
खाली हाँथो ही लौट आए वो।
चहरा' जिसका जनाब सच्चा था।।
वक्त का साथ कब निभा पाया।
वक्त का साथ एक सौदा था ।।
घर की हर ईट ईट सीलन पर ।
पूछता फिर भी हाल कैसा था।।
याद आई है' आज फिर उनको।
जिनका कहना की' गाँव मैला था ।।
मुफलिशों के घरों को' भर दूँगा ।
राजनीतिक मजाक अच्छा था ।।
मौलिक/ अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी , फतेहपुर- उत्तर प्रदेश
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