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मई, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बुढ़ापा बचपन ही तो है...

अब तू बच्ची हो जो कहु वही सुना कर बच्चों की तरह जहाँ बैठाऊ वही बैठा कर जहाँ लेताऊ वहीँ लेता कर सा समय खाना खाया कर सा समय सोया कर जादा मेहनत न करा कर अब मै तुमसे सयाना हु कर लूँ...

वक्त ज्याया न कर...

सफ़र में आ भी जा, वक्त जाया न कर मै हूँ साथी तेरा ,मोहब्बत बताया न कर... आँखों में देख के,झांक ले तू ह्रदय खार बह जाने दे,इन्हे सुखाया न कर थाम हथेली मेरी ,आ करीब हम -सफ़र पास रह के मेरे ,...

@कुत्ते की दुम

@कुत्ते की दुम.. आज के समय में कुछ मित्र अपने आप को खुदा मान रहे थे । अभी हाल ही के दिनों की बात थी । कुछ आलोचक मुह उठाये सुधार आन्दोलन छेड़ रहे थे। कभी खुद करता बन जाते है । कभी साथ...

समय.....

समय... अरे रुक जा ! कुछ पल ...ठ हर.. स्पर्श तो होने दे... खुशियाँ... ख्वाब... रिश्ते.. रिस्वत ले...ले....ठहर.. एक ,दो,तीन....पाँच.. ले रख ले... गुल्लक....ठहर नाराज न हो मै दादी के पास था कहानिया .... चुटकुले... सपन...

चौक.....

=====चौक====22/05/15 ताजा पके सब्जी मसाले सा ललचाती है कभी चौक.. तीखे मिर्चों सा कभी कभी लरज जाती है तभी चौक.... बुंबुंआ  बुंबुंआ के रोती है दिन,दोपहर,रात यह जब अपनी बहन की आबरू लुटते देख जाती ...

ये अब...आज

ये अब जो हमारा आज  है मै जौहरी बन एक एक नग अच्छी तरह से बैठना चाहता हूँ..... कल जब यह बाज़ार में बिके बढ़िया कीमत में बिके... आमोद बिन्दौरी21/05/15

बदलाव का अंतिम क्षण

सब तो बदल गया है राख के एक ढेर में.... कुछ बचा है तो वो भी सुलग रहा है कुछ देर में... अभी हवा शांत है.. दोपहर तक इसे बिखेर देगी... दूर दूर तक....फैलाव ले... फिर किसी नए परिवार नए समाज का हिस्सा ...

वो बात नहीं....

वो बात नहीं अब, बात  बताने में.... अपनी पह्चान नहीं,उनके घर  जाने में... हकीमों की दवा ही, जहर हो जब मतलब क्या है ,औषधि खाने में... अब सपने रहने दे ,कपाट ढका मन लगा  है तू ,हर्फ़ हर्फ़ उड़ाने ...

तू वहम न कर....

चढ़ गया है रंग तुझ पर भी, तू वहम न कर... जंगे मैदान है जा लड़, तू रहम न कर... गिर गया है उठ जा,थाम शमसीर हांथो में जख्मों को न देख तू मरहम न कर.... इन्सानों का मुहाफिज है ,देख आँखों में सब के सब ...

चपल....

चन्द्र बदन ......!!! चतुर...... चतुर...... चतुरता ..... चतुराई...... ..................................... चप्पू .... चढ़ावा.... चन्दा.... चंदवा..... चटपट ..... चटख..... .................................... क्यों??????? चपत .... चपल ..... चपाती...... आमोद बिन्दौरी 16/05/15 भावार्थ सदर समर्पित..... उज्जवल गुणव...

मयन्कात्मक......

मयंका शीतल .... मयंकात्मक शीतल है अवशेषी कण... अनापेक्षित  छोटे... समीर के झोंकों में मिश्रित ... विलेय मान ... थोड़ा नीचे.... थोडा ऊपर .... सर्पाकार.... गोलाकार.... स्वतंत्र...वेग लेकिन अस्वतंत्र......

छलावा...

पुष्पों में सुबह  छहारी ओश.. योवन से  भरी .... भीनी महक.... दिन की बागडोर  लिए.... रवि की किरणों के इंतजार में... प्यार में.... विस्वास में... स्नेह लिए.. दूर दूर तक वजूद जोए... प्राकृतिक  छटा का ...

उसने रोका था......

पुरजोर सफ़र रोकती थी , मेरे प्यार में  खडी होकर कहती थी न जाओ न जाओ , मेरे सामने खड़ी होकर .... बे-सुध थी हालात से , मुझसे लिपटी थी इस कदर आँखे भी डबडबाई थी , सूखा में लड़ी होकर .... दुपट्टे का...

तंदूर की भठ्ठी…2

चित्र
तंदूर की भठ्टी की धधकती दीवाल पर… चिपकी …रोटी सोधा पन लिए बढ़िया स्वाद लिए गरमा गरम… पेट की आग बुझती है… दायरे… की तपती दीवाल… मे बंद रह… तपती है … जलती है… समाज की आग में… द...

तंदूर की भठठी…

तन्दूर की भठ्ठी…10/05/2015 भारत ने 21वीं सदी  की विकास डोर ज़रूर थाम्भ ली थी राज नैतिक  स्थितिया और स्त्री विकास की गति विधि तेज थी। कई महिला अई पी एस भी हुईं ।संसद छेत्र भी आजमाया पर आज...

मैने झाँका हैं…वो बात नहीँ संगेमरमर में…

मैने झाँका है… मैने झाँका है… घर के पौढ की आँखों में… मैने झाँका है… बूढ़ी माँ की आवाजों में… मैने झाँका है… उस पौढ की तर्जनी उँगली में… मैने झाँका है… कन्धा बैठाए बचपन में...

यादें Vs. बदलाव

यादें Vs. बदलाव गर्मियों की छुट्टी में मेरे गाँव घर रिस्तेदारों का मजमा रहता था … कुछ ममेरू -फुफेरु कुछ पारिवारिक गाँव घर जमाकडा रहता था… एक सरसों और बिजरी तेल से नमक लिपटी र...

@कोर्ट फ़ैसला Hit_run

कोर्ट , सभाएँ ,और प्रतिस्ठा की बोली…बोली जाती हो… रुह रुपयों से ख़रीदी जाती हो रूपयो मे बेची जाती हो… बिंदौरी वहाँ रहना ठीक नहीं जहाँ…मृत इंसानो की क़ीमत बोली जाती हो… जो आशि...

मुसाफिर अनजान हूँ जैसे…

घी का  कच्चा घड़ा हो दिल बेधा मुझमें उसका प्यार है ऐसे… ये धड़कन ऐसे धडकती है उसका अधिकार हो जैसे… बेदनाओं का पता है बस ख़ुशियाँ आज नर्वस हैं ऐसे… आँखे उन्हे ही तलासती हैं वो म...

दोस्त …

दोस्त… बिल्कुल वैसा का वैसा है मेरा दोस्त अभी तक वैसा है जिसे भूल गया था मे कब का वो प्यार अभी तक वैसा है… अब भी उसके जिस्म में मेरी चाहत की ही साँसे हैं आँखो मे उसके दरिया हैं ...

हमारे विकास में सहायक…फैशन और फिल्म उद्योग

सन 2015 हम विकास शील देशो की सारणी में सबसे ऊपर हैं।आज हमारे समाज में हिन्दी फिल्मों का बढ़िया प्रभाव है। सबसे ज्यादा कारगर सनी लियोन जी हैं । ये कम कपड़ों मे जीवन यापन का संदेश और...

गजल …

रंग चढ़ जाएगा मुझ पर भी ,तू अहम न कर ऐ जिन्दगी मैने गिर के उठना सीख लिया है मंज़िल का रहनुमा बन जा ऐ दर्द तू मेरे गिर गिर के सभँलना ,जो मैने सीख लिया है थम जाओ चस्मे कतरों ,के वो आ र...

ग़ज़ल

अफ़साना नहीँ आमाल है यह खुलफामे नज़र रखा कर अपने शहर में इशरत रख गामा तफशीर में बेरुखी का मकाम है तेरे शहर में अब फैज समझ दरिया दिली मेरी आफताब हूँ मे अब तेरे शहर में अल्फाजे ख...