बदलाव का अंतिम क्षण
सब तो बदल गया है
राख के एक ढेर में....
कुछ बचा है तो
वो भी सुलग रहा है कुछ देर में...
अभी हवा शांत है..
दोपहर तक इसे बिखेर देगी...
दूर दूर तक....फैलाव ले...
फिर
किसी नए परिवार
नए समाज का हिस्सा हो
नयी दुनिया बनाये गा....
यही दूर दूर तक फैला कण ....
सायद यही है !!!
बदलाव का अंतिम क्षण...
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