बातों'- बातों सवाल आया कुछ।।
2122-1212-22 बातों'- बातों सवाल आया कुछ।। हिज्ज्र जैसा विसाल आया कुछ।। उस गली का खयाल आया कुछ।। मुश्क आई मलाल आया कुछ।। कितना दो रंग हो गया हूँ अब । आंख में भर निकाल आया कुछ।। भूल जाते हैं लोग खुद को ही। रुतबे' में जो उछाल आया कुछ।। मैंने' उनको भुला दिया उस-दिन । जबसे लहजे में चाल आया कुछ।। रास्तों की कहानियाँ बिल्कुल। वैसी' सुहबत में डाल आया कुछ।। लोग कहते हैं कीमती था वो। मैं तो क़ीमत निकाल आया कुछ।। देख वीरान टूटी' ये कश्ती । खून में यूँ उबाल आया कुछ।। रौनक़- ए- कारोबार है ओझल। मुश्किलें भर ये साल आया कुछ।। आमोद बिंदौरी / मौलिक -अप्रकाशित