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इश्क के दो बोल मीठे ..

इश्क के दो बोल मीठे सुन  न पट जाऊं कहीं।   बह्र:- 2122-2122-2122-212 होश खोकर मैं न पल्लू में सिमट जाऊं कहीं।। ना किसी कमसिन के होठों से लिपट  जाऊं कहीं।। डर रहा हूँ आज अपने उम्र के इस खेल में। इ...

मुक्तक

हर बात हर सख़्श समझता तो बात और थी । जख्मों के तू अश्क समझता तो बात और थी । तेरे लिए तो महज इक दिखावा है ये सब। तू चाँद सा रश्क समझता तो बात और थी।।...@mod

अब समझ नहीं आ रही बेरुख़ी

बह्र -212-212-212-212 मैने कह तो दिया जिंदगी आपकी।। अब समझ में नहीं आ रही बेरुख़ी ।। धड़कनें दिल की अपने जवां गिन कहो। क्या  बदलती न  मेरे लिए आज भी।।। आप समझें मुझे गर खिलौना न गम। मुझको स्...

टूटा दिल0

गम का कोई अंदाज हो तो बताइए    माप परिमाप हो तो बताइए.. मैं भी टूटे दिल के टुकड़े ढक लूँ, कोई लिबाज़  हो तो बताइए.... आमोद बिन्दौरी

हमनशीं साथ बैठो करें गुफ़्तगू

बहर 212/212/212/212 हमनशीं साथ  बैठो करें गुफ़्तगू/ जिंदगी से भी होते रहें रु-ब-रु// आइना है तू मेरा बता हाले दिल/ खुल के कह दो छिपाते नहीं आरजू// चाँद अपनी सुनाओ सुनो कुछ मेरी/ सबसे प्यारा खिल...

बचपन

बचपन .... एक योद्धा होता है...... जो दर्द ..गम/ को सदैव धरासाई रखता है / ये उस मधुमख्खी की तरह है जो / ग्रीष्म की तपती धरती पर भी/ ख़ुशी का मधु / अपने छत्ते (कुटुंब) बरक़रार रखता है / इस मधु का स...

मुक्तक

. सभ्यता तो लपेट दो गालियों के किरदार में।            नग्न लगती है ये अपने व्यवहार में।। जरूरी नहीं बज्म मे ये शमशीर चले।         सुई भी दर्द देती है अपने आभार में।। आमोद बिं...

मैं छोटा था ???

(मैं छोटा था ..)®© मैं छोटा था .. मुझे बड़ा कर दिया गया मैं मामूली था । मेरी कीमत बढ़ा दी गयी मैं अंजान गुमनाम था मुझे शो रूम ले लगा दिया मैं नीचे था मुझे ऊपर कर दिया ... मैं बे सहारे में थ...

जीवन संघर्ष

कभी कभी ये समाज में मैं पल पल मरता दिखाई देता हूँ घुटन होती है इस झूठ और सच की हिंसा से..... और मन अहिंसा वादी बन सोच बैठता है क्यों न कोई नयी दुनियाँ ढूंढ लू कोई नया ग्रह जहाँ शां...

मंजरी इन हवाओं में दिखने लगी

मंजरी जो लताओं में दिखने लगी। आशिक़ी इन हवाओं में दिखने लगी। आया फ़ागुन उठा झूम सारा जहाँ। भांग ठंडाई जुबाँओं में दिखने लगी।। आमोद बिंदौरी

खयालो का क्या???

ख्यालों का क्या ,ये तो नित नई खिचड़ी पकाते हैं। कोई कतरा भी गिरता है, तो उस पर मुस्कुराते हैं ।। हूँ जिन्दा बंद कमरों सा, बड़ा बेजान सा हूँ मैं। खिड़कियाँ खड़कती हैं तो दरवाजे गीत ...

इस नशेमन की मोहलत है तब तक

बह्र:- 2122-1221-22 वक्त बे वक्त का आसरा है।। घर का टुटा हुआ जो घड़ा है ।।1   जो  मुहब्बत में अपनी बिका है। उसको दौलत ओ शुहरत से क्या है ।।2 जब समझलो की क्या माजरा है। बोल बोलो नही कुछ बुरा है।...

नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ

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1212-1122-1212-112 शुरू कहाँ से करूँ ओऱ कहाँ से बात करूँ।। नजर से वार करूँ या जुबाँ से बात करूँ।। मुझे तो इतना तज्ज्रिबा नहीं मुहब्बत की। फ़िसल वो जाएं शुरू मैं जहां से बात करूँ।। कोई हसीन स...

तुम्हारे जैसा कोई खुश नुमां नहीं मिलता

बहर :-1212-1122-1212-22 गरीब वो हैं कि जिनका मकां नहीं मिलता।। अमीर वो जो कभी खामखां नहीं मिलता।। कोई भी शख़्स मुझे खुश नुमां नहीं मिलता।। मुझे तो दर्द भी हँस कर मियां नहीं मिलता।। मैं ढूंढता हूँ तो खुद का निशाँ नहीं मिलता।। शह्र में तेरे मिरा हम जुबाँ नहीं मिलता।। मिले बहुत से मगर और बात है तुम में।। तुम्हारे जैसा कोई खुशनुमां नहीं मिलता।। कसम भी प्यार में खाई कसम को तोड़ा भी। हाँ यार तुम सा कोई बागवां नहीं मिलता।। समय के फेर में उलझा है आदमी कुछ यूँ। हमें जहाँ है जरुरत वहाँ नही मिलता।। जहाँ पे सिख - इसाई ,न हिन्दू - मुस्लिम हो।। मैं ढूढ़ता हूँ जिसे ,कारवाँ नहीं मिलता।। है आलिशान मकानों की त्रिश्नगी जैसा । मगर मिला जो मुझे ,प्यार हाँ नहीं मिलता।। जो शख्स मेरी मुहब्बत की इक इबादत है। वो अब मुझे ही मेरे दरमियाँ नही मिलता।। मुझे न रात की तन्हाई मार पाती यूँ। जो कमरा मेरा मुझे बेजुबाँ नहीं मिलता।। कोई हो शर्त मुहबत की मान लेंगे वो। जिन्हें ये इश्क उमर भर मियां नहीं मिलता।। उन्हें गजल से मेरी आज भी शिकायत है। की शेर इश्क ...