जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है
मंजरी इन हवाओं में दिखने लगी
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मंजरी जो लताओं में दिखने लगी।
आशिक़ी इन हवाओं में दिखने लगी।
आया फ़ागुन उठा झूम सारा जहाँ।
भांग ठंडाई जुबाँओं में दिखने लगी।।
आमोद बिंदौरी
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