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मई, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुखा पीपल

सूखा पीपल हवा का झोका आया और खर खर खर कु आवाज  से पीपल के पत्ते जमीं पर बिखर गए.. अब न मालूम पड़ रहा था कौन किस फ्लोर का निवासी  है और किस महंत के शिष्य है सब एक झुण्ड में तो थे लेक...

बात उनसे हो रही है

बात उनसे हो रही है आज कल दिल खोल के... पर  नही है इश्क हमसे रोज ऐसा बोलते..... डरती हैं दिल की लगी से दूर भी रहती नही.... प्यार करते दिल ही दिल में नीर नैना तोलते...... थर थराते होठ उनके और मचलत...

तन हारे मन हारे

जब भी तुझे देखा ह्रदय तार झनके प्यार के शहर गीत श्रंगार पनपे कुछ इस अदा से निखरा है जीवन मेरा अधरों से लिपट मेरी बंशुरी  बनके .... फिजा में फैली महक तेरी तन में भरी है दहक तेरी अ...

अध्यन से अर्जित ज्ञान

#समीक्षा अध्यन से अर्जित ज्ञान साहित्यकार को ठीक उस प्रकार प्रभावी होता है जैसे पठार  से निकली नदी ढेरो लावा ले कर तराई में मंद प्रवाह की हो जाती है.... और दूसरी ओर अध्यन से अर्...
वजीर के बिना शतरंज तो जीती जा सकती है पर जमीर के बिना जिन् दगी नही……आमोद