सुखा पीपल
सूखा पीपल हवा का झोका आया और खर खर खर कु आवाज से पीपल के पत्ते जमीं पर बिखर गए.. अब न मालूम पड़ रहा था कौन किस फ्लोर का निवासी है और किस महंत के शिष्य है सब एक झुण्ड में तो थे लेक...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है