अलग ये बात है लहजा जरा नहीं मिलता
बड़ा शह्र है ये अपना पता नहीं मिलता।। यहाँ बजूद भी हँसता हुआ नहीं मिलता।। दरख़्त देख के लगता तो आज भी ऐसा । के ईदगाह में अब भी खुदा नहीं मिलता।। समाज ढेरों किताबी वसूल गढ़ता ह...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है