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मार्च, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अलग ये बात है लहजा जरा नहीं मिलता

बड़ा शह्र है ये अपना पता  नहीं मिलता।। यहाँ बजूद भी हँसता हुआ नहीं  मिलता।। दरख़्त देख के लगता तो आज भी ऐसा । के ईदगाह में अब भी खुदा नहीं मिलता।। समाज ढेरों किताबी वसूल गढ़ता ह...

इक तेरी तस्वीर और अंतिम तेरा वो फैसला 2

बह्र   2122-2122-2122-212 एक है मंदिर ओ मस्जिद, एक है सब का खुदा। दे जो जिस्मों को रहा है , हर कदम पर हौसला।। बढ़ रहा हूँ कुछ कदम मैं , कुछ कदम ठहरा हुआ । अब बहुत उलझा रहा है जिंदगी का रास्ता।। मन मे...

दे रहा है जो जिस्म का हर कदम पर हौसला

बह्र   2122-2122-2122-212 दे रहा है ज़िस्म को जो दर कदम पर इक सिला।। इक तेरी तस्वीर और अंतिम तिरा वो फैसला।। खंडरों की शानों शौक़त दिन ब दिन बेहतर हुई। जैसे पतझड़ कह रहा हो लौट मुझको मय पिला।। ब...

गर बचेगा कुछ मिरा वो शाइरी ओऱ नेकियां

बढ़ गई जिस दौर रिश्तों की नमीं और दूरियाँ बह्र:-2122-2122-2122-212 बढ़ गई जिस दौर रिश्तों की नमीं और दूरियां ।। खुद-ब-खुद लेनी पड़ी खुद को  खुद की सेल्फियां।। जिसको समझा शान आखिर अब वोआकर के खड़ा...

जीस्त नीला लाल पीला और काला हो गया

जीस्त नीला लाल पीला और काला हो गया बह्र:-2122-2122-2122-212 जीस्त नीला लाल पीला और काला हो गया।। ये खबर जब यूँ मिली के तू पराया हो गया।। धुंध छा जाती न आँखें रोक पाती अश्क अब। तेरे बिन जीवन यू...

सोंच को इक तीर करती है

सोंच को इक तीर करती है। बह्र - 212-221-221 सोंच को इक तीर करती है ।। कुछ यूँ ये  तस्वीर करती है।। कुछ भी हो की बात कर और। मन में हलचल पीर करती है।। दर्द उलफत है ये सायद की। दिल को रिसता नीर ...

कविता

चित्र
विकास के लिए हौसला विश्वास.. प्यार... और सामंत सब चाहिए... पर ऐसा जो खुद भी समझाता हो... उस मूक भाषा को.. जैसे.. कुम्हार.. मटकी पिटता है..पर टूटने नहीं देता... तपाता है....तो कच्ची रहने नहीं दे...

ढाकिये अपने ही तन के जख्म कोई गम नहीं

2122-2122-2122-212 खूब सूरत है चमन चश्मा हटा  कर देखिए। जीस्त में उल्फत भरा किरदार ला कर देखिए।। ढाकिये अपने ही तन के जख्म कोई गम नहीं। पर ये खुशियाँ  गैर के चेहरे सजा कर देखिए।। एक सा होगा ...