जीस्त नीला लाल पीला और काला हो गया
जीस्त नीला लाल पीला और काला हो गया
बह्र:-2122-2122-2122-212
जीस्त नीला लाल पीला और काला हो गया।।
ये खबर जब यूँ मिली के तू पराया हो गया।।
धुंध छा जाती न आँखें रोक पाती अश्क अब।
तेरे बिन जीवन यूँ मेरा टूटी माला हो गया।।
कैसे खुद को मैं बचाता प्यार का है रंग चटख।
प्रेम के रंग से लिपट जब ईश ग्वाला हो गया।।
कुछ बताया अश्क ने यूँ अपनी इस तक़दीर पर।
जब से प्याली में वो टपका तब से हाला हो गया।।
ठोकरें बदली मुक़द्दर, गन्दगी मन जब हटी।
स्नेह की बरखा हुई तब मैं नहाया हो गया।।
वक्त की ज़ुल्मी हवाओ से उलझ कर आजकल।
सच कहूं अपना मुक़द्दर खोया पाया हो गया ।।
रूठ कर जाना न आना भूल जाना बे वजह।
था यही हिस्सा हमारा और आला हो गया।।
आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशित
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