मगर तू हारता जा
मैं जब हारता हूं । यूं अक्सर हारता हूं। तो जब हारता हूं । दिल कहता है करेगा क्या ?? अभी तो लंबी है जिंदगी ,करेगा क्या ??? कुछ नही तो यही कर ...हारता जा हारता जा ...की कुछ जीत जाए न जीता तो , हार की उम्मीद तो होगी बहे इन अंशुओ से ... शुष्क गालों में । नमक लिपटी कोई रेखा कोई कुछ खुरदुरी सी रेत कोई मुरझाया ,उलझे गंदे बाल, आंखों में कीचड़ गले की दरदरी फटती कोई आवाज कोई धूसर सी चमड़ी, टेढ़े ,टूटे गंदे दांत कहने को कोई किस्सा रखेगा जुबानी याद जुबानी याद ....जब कोई न हो न हो तो खुद से कह लेना .. मगर तू हारता जा , हारता जा ,हारता जा आमोद बिंदौरी ©®