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मार्च, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या कहेंगे लोग आखिर

बह्र:-2122-2122-2122-212 क्या कहेगे लोग आखिर मेरी गजलें देखकर। मैं किसानों की तरह ही खुश हुँ फसलें देखकर।। जिनके घर छप्पर पड़े हैं आदमी क्या वो नहीं। रो रहे है कुछ अमीराँ अपनी नस्लें देखकर...

लेखक श्री सुशील राकेश जी

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कवि सुशील राकेश ।। मेरा परिचय ।। मैं अपना परिचय इसलिए दे रहा हूँ कि मेरे फेस बुक के मित्रों ने मेरी बारे में जानना चाहा है कि मेरा परिचय क्या है? कवि सुशील राकेश ।।जन्म :07 अक्ट...

बिछौने छीन लेती है

मुझे कागज कलम देकर बिछौने छीन लेती है। मेरी ये लत सभी मेरे ख़ज़ाने छीन लेती है। सफ़र राही हुँ मैं तन्हा उसे कैसे बता पाता। वो पहले ही बची नीदों से सपनें छीन लेती है।। ये आदत पड़ ग...

बिछौने छीन लेती है

मुझे कागज कलम देकर बिछौने छीन लेती है। मेरी ये लत सभी मेरे ख़ज़ाने छीन लेती है। सफ़र राही हुँ मैं तन्हा उसे कैसे बता पाता। वो पहले ही बची नीदों से सपनें छीन लेती है।। ये आदत पड़ ग...

बिछौने छीन लेती है

मुझे कागज कलम देकर बिछौने छीन लेती है। मेरी ये लत सभी मेरे ख़ज़ाने छीन लेती है। सफ़र राही हुँ मैं तन्हा उसे कैसे बता पाता। वो पहले ही बची नीदों से सपनें छीन लेती है।। ये आदत पड़ ग...

अमासी रात मेरे घर के तारे

अमासी रात मेरे घर के तारे छीन लेती है।। तूफानी रात आये तो गुजारे छीन लेती है।। मैं आँखें बन्द रखता हूँ मेरी यादें छुपा कर के। खुला पाती है जब भी वो नज़ारे छीन लेती है।। मेरी कि...

जीवन हया क खेल है

जीवन हया का खेल है या यूँही कुछ लगा कैसे कहुँ की क्या कहाँ मेर दिल को क्या हुआ मसरूफियत में नैन है आदत है इश्क की दिल में कसक की आग है मिन्नत है इश्क की ज़ख्मो का सुरखरू हुआ कुछ ...

बे सबब रिश्ते ओ नातों के लिए बिफरे मिले

दो बहरी गजल:- 1बह्र:-2122-1122-1122-112 2बह्र:-2122-2122-2122-212 बेसबब रिश्ते -ओ-नातों के लिए बिफरे मिले।। जब मिले मुझको मेरे  सपने बहुत उलझे मिले।। ज़िन्दगी जिनसे मिला सब ही बड़े नम से मिले।। मैं उसे समझू मसीह...

दिए तो रौशनी के लिए होते हैं

[3/16, 6:32 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: 2122-1212-22 जब मुहब्बत नही वफ़ा कैसे।। तूने आखिर ये ख़त लिखा कैसे।। रात यादों में अब नहीं कटती। राज इतना बड़ा खुला कैसे।। रौशनी के लिए जो जलता है। उन चिरागों ...

प्रश्न चिन्ह??

प्रश्न चिन्ह...???... अबकी बार भी खेतों के रंग बदले.. हिंदी माह फागुन... आया... बसंत गुजरने से नई कोपल मुस्कुरा रही हैं... और खेत की पगडण्डी में हरी दुब ... सुबह मोती जैसी ओस की बूंदों में सज...

वो मेरे घर का आँगन

वो मेरे आँगन की पश्चिमी दीवार आधी सुनहले रंग से रंगी.. आधी अपने रंग से ..... और नीचे मेरे  स्याही के पेन की छीटे और मेरी अरबी आयतों की तरह खीचीं.... आड़ी तिरछी रेखाएं..... संजोए.... भोर के सम...

महफूज अब नही है मुहब्बत के रास्ते

बह्र:-221-2121-1221-212 सौगात अब नही हैं चाहत के रास्ते।। महफूज भी नही है मुहब्बत  के रास्ते।। हुस्न-ए -मतला खाका निंकल रहें हैं सराफत के रास्ते।। दागे जमीं से अब यह उल्फत के रास्ते।। शिक...

वो अक्सर रूठ ....

वो अक्सर रूठ जाते हैं बह्र:-1222-1222 वो अक्सर रूठ जाते हैं।। जिन्हें हँस कर मनाते हैं।। फ़क़ीरी से नही शिकवा। मुकद्दर ही रुलाते हैं।। मेरा सजदा उन्हें है गुल। फ़िज़ा को जो सजाते हैं।...

दर एक से पर्दा

बहर :-122-22-122-22 छुपा के नज़रें मिलाना होगा।। दर एक से पर्दा उठाना होगा।। न आयेगें जो बुलाना होगा।। वो मेरा दिल हैं मनाना होगा।। जो दिल ने उनकी सुनी जो आहट। तो बहते आंसू छिपाना होगा।।...

दौरे हाजिर में हम भी हिले

दौरे हाजिर में  हमभी हिले बह्र:-212-212-212-212 दौरे हाजिर में हम भी हिले कम से कम।। अब मिटे इश्क के फासले कम से कम ।। वो न आये न आने का वादा किये। हाँथ ख़त आएं उनके लिखे कम से कम।। शहर ईमारतें...

जो दिल से मुहब्बत करूँ

जो दिल से मुहब्बत करूँ तो बह्र:- 122-122-122-122 मैं दिल से मुहब्बत करूँ तो बुरा क्या?? जो ऐसे इबादत करूँ तो बुरा क्या?? बुरा क्या है जीवन में मुझको बता दो। जो तुम से ही नफरत करूँ तो बुरा क्या?? ऐ ...

मेरा जुगनू सा सब परिवार होंगे

समय की मार से दो चार होंगे// मेरे बच्चे तभी तैयार होंगे// मुहब्बत के खुले बाजार होंगे// हमारे शेर तब अख़बार होंगे// न समझो दुश्मनों को काम जवानों/ नकाबों में छिपे ऐय्यार   होंगे// ज...

मैं अबला लाचार नहीं हूँ

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--------------- मैं अबला लाचार नही हूँ// औरत हूँ तलवार नही हूँ// ----------------------------------- घर बाबुल का रौशन मुझसे/ मैं गुड़िया हु भार नही हूँ// ------------------------------------- मत मारो जनने से पहले/ बेटी हूँ गद्दार नही हूँ// ------------------------------------ डरता है मु...

दो गजले

212-212-212-212 फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन काफ़िया 🍂🍂 आने रदीफ़ 🍂🍂 लगे क्यों दिए सब घरों के बुझाने लगे// जख्म खा के नए जख्म खाने लगे// जिंदगी से हमें कोई शिकवा नहीं//चाहे मिलने में उनसे ज़म...

इक कसक इश्के बीमार

बहर:-2122/1221/1221/12 प्यार का हूँ तलबगार खुदा खैर करे// हो गया मैं गिरफ्तार खुदा खैर करे// उनकी बाते नशीली हैं मदिरा की तरह/ बज़्म सारी हुई मैख्वार खुदा खैर करे// आज आतिश लगे लोगों के बातें लहज...

खुदा खैर करे

212 /2112/2112 इश्क की रात खुदा खैर करे// हो वही बात खुदा खैर करे// बेक़रारी लिए हैं अहले- वफ़ा/ बस मुलाकात खुदा खैर करे// आहटें जब सुनी क़दमों की तेरे/ हैं सवालात खुदा ख़ैर करे// कुछ चुभा है जो ...