वो अक्सर रूठ ....

वो अक्सर रूठ जाते हैं
बह्र:-1222-1222

वो अक्सर रूठ जाते हैं।।
जिन्हें हँस कर मनाते हैं।।

फ़क़ीरी से नही शिकवा।
मुकद्दर ही रुलाते हैं।।

मेरा सजदा उन्हें है गुल।
फ़िज़ा को जो सजाते हैं।।

मेरे महबूब के आमद ।
पे गुल भी मुस्कुराते हैं।।

मेरे कदमो की आहट सुन।
जो दौड़े दर पे आते हैं।।

नमन उनको है बस मेरा।
जो दिल से दिल मिलते हैं।।

मुक़र्रर बस यही होना।
की कैसे नाते रिश्ते हैं।।

सजा उनसे मैं क्या मांगूँ।
सजा -ऐ -मौत नाते हैं।।

आमोद बिन्दौरी

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