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आज नहीँ कल

meri aur teri parchayiyon me koi najar ayega lekin aj nahi kal koi muskurayega.... ethalayega.... aur ek nyi duniya ki paheli ban jayega lekin! aj nahi kal

####बुरा ना मानो होली है

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रंग बदल जात भौजाईन का  यदि घूम आई ऊँ शहर...   औं-मुह से निकले लागे उनकेँ,  हाय-हैलो की लहर....   मोबाईळ मा बतियाँय लागैँ,  प्रितम संग वो अपनै ....   लागैँ ळागेँ घर मा उनका,  संस्कार भी कहर....   चाल बदल जावे भौजिन की , लागे लागैँ हीरोईन....   जीँस टी-शर्ट पहिन के निकलेँ,  कैट-करीना की बहिँन....   भौजिन का बिँन्दौरी द्याखा(देखा),  का बढ़िया है रोब.....  हिन्दी आँग्रेजी का इनमा, खूब बढियाँ संजोग.....

#######dil ek dastan दिल एक दास्ताँन

दिल दास्ताँन बडी अजीब होती है। खुली आँखोँ मेँ उनकी तस्वीर होती है। हर बात लगती है प्यारी उनकी कोई पसँद करे उनको तो खीज होती है 72 धडकन....बिन फड फडाहट आँखो के अश्क.....अन देखे काँपते होठ.....अन सुने उलझन की ताबीर होती है दिन भर देखना......आदत नजरेँ झुका के उठाना....ईबादत मुड मुड के देखना.....नशा दिल की धडकन,रेत की लकीँरेँ फिर भी बिँन्दौरी खुश नशीबहोती हैँ... दिल दास्ताँन बडी अजीब होती है.,.. (आमोद बिँदौरीँ...) 8 मई को 08:18 अपराह्न बजे

अपने नाम के लिए(apane naam k liye)

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गिर कर उठना पडा हवा सा ठहरना हुआ परिन्दो सा उडना पडा गर्त मे मिलना पड़ा अप ने नाम के लिए ठंडा घङा बनना पडा आग सा तपना पडा सर को झुकाना पडा या सर कटाना पडा अपने नाम के लिए ईज्जत ब...

####उनसे एक मुलाकात....CHAYA CHITRA Srivastava Amod Bindouri

कई वर्षो मे ...आज सुबह उनसे अचानक मुलाकात हो गई....मैँ और वो दोनो नजरें नही मिला पाए... जो उल्झने मेरे पास थी शायद वही उसके पास भी थी ...... मेरी नजरो मे तो थहराव भी था... पर वो वो सभल भी नही पा रहे थे ... एक अजीब सी....कशिश लब भी बड़-बड़ा रहे थे जैसे मुझसे एक शब्द मे बहुत कुछ कहना चाह रहे हों....... पर आँखो की नमी के साथ मेरेओर देख रही थी... 'चेहरे पर तिल मिळाहट से'...."कैसे हो" ठीक:-)... इसके शिवा कोई जवाब ही नही था.... शायद बारिश की वो बूँदे जो हाँथो से फिसल कर जमीँन पर सुख गई थी... उन्हे मैं निँचोड नहीं सकता था... ....मेरे दो बच्चे हैं.! ......._ये दोनो के नाम हैं ! ...कैसे है.?? हाँ. अच्छे है.... .....प्यारे लग रहे हैं .. बिलकुल तुम्हारी तरह :-)... "शायद आज मै उसको भाँप नहींपा रहा था" अच्छा.. तो..अब.. चलती हूँ... हाँ.. बड़ा अजीब लगा ये शब्द... पर सच ये था.. की उसके पास आज मेरे लिए समय नहीं था वो अब दूर जा रही थी.... मेरी ओर अजीब सा देख थी.... उसकी आँखे भीग रही थी..... डुपट्टे से जैसे ....दुश्मनीसी हो गई हो... बार-बार झटक रही थी.... जुल्फेँ.... मुझे देखने स...

#######हवायेँ

क्योँ आज वो हवायेँ बिँदौरी मुझसे मेरा हाळ पूँछ बैठी हैँ क्या बदल रहा है वक्त मेरा जो इस तरह से बाँहे डाल बैठी हैँ कल तक नजरो से देख घुमा लेते थे जो आज नजरे लगा के बैठी है जाने क्या 2 कहा था कल जब हमने हाळ पूँछा था आज आमोद मेरे घर मेँ आ के बैठी हैँ शर्म और हया जो बडे दूर की बात थी आज वो आँचळ मे छिपा के बैठीहै मै कुछ बोळू कल के जवाब मे मासूम सी नजरो को आँशुओँ मे डूबा के बैठीँ हैँ शब्दो के संग्रह से ढूँढताहूँ क्या बोळू मैँ आज वो बिन शब्दो के मेरे पास आके बैठीँ हैँ उनकी नजरेँ हर सवाळ का जवाब हैँ मेरे और गर्म शाँसे मेरे दिल के पास जा बैठीँ है क्योँ आज वो हवायेँ बिँदौरी मुझसे मेरा हाळ पूँछ बैठी हैँ क्या बदल रहा है वक्त मेरा जो इस तरह से बाँहे डाल बैठी हैँ

#####आज सुबह(एक तारीख)

आज सुबह जब नीँद खुली तो मेरे दिल का मेरे मन से सामना हो गया,दोनो की आपस की तना तनी देख, मैँ अनजाना हो गया देखा दोनो मेँ दम था.... न दिल कम था-न मन कम था बातेँ कुछ बढीँ.... कुछ दिल ने बकीँ-कुछ मन ने बकीँ मन चँचल था दोस्तोँ कभी इधर,कभी उधर कभी इश डाल पर,कभी उस पेँड पर कोई जमीँन नहीँ थीँ पर दम था अनुभव से जो समेँटा था कहने का रस था दिल.... दिल स्थाई था आधार कठोर था पकड मृदु थी पर मजबूत थी रिस्तो मेँ प्यार तलाश रहाथा उसी मेँ जिन्दगी गुजारनेँ की सळाह दे रहा था मै कुछ समझ नहीँ पाया किसका साथ दूँ सूरज सर पर चढ आया था दोनो से छमा माँगी और निर्णय को तारीख दे दी और धरती माँ के चरण श्पर्श कर दिन की शुरुआत कीँ...