#####आज सुबह(एक तारीख)

आज सुबह जब नीँद खुली तो मेरे दिल का मेरे मन से सामना हो गया,दोनो की आपस की तना तनी देख, मैँ अनजाना हो गया देखा दोनो मेँ दम था.... न दिल कम था-न मन कम था बातेँ कुछ बढीँ.... कुछ दिल ने बकीँ-कुछ मन ने बकीँ मन चँचल था दोस्तोँ कभी इधर,कभी उधर कभी इश डाल पर,कभी उस पेँड पर कोई जमीँन नहीँ थीँ पर दम था अनुभव से जो समेँटा था कहने का रस था दिल.... दिल स्थाई था आधार कठोर था पकड मृदु थी पर मजबूत थी रिस्तो मेँ प्यार तलाश रहाथा उसी मेँ जिन्दगी गुजारनेँ की सळाह दे रहा था मै कुछ समझ नहीँ पाया किसका साथ दूँ सूरज सर पर चढ आया था दोनो से छमा माँगी और निर्णय को तारीख दे दी और धरती माँ के चरण श्पर्श कर दिन की शुरुआत कीँ...

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