जीवन पथ पर संशय गढ़कर ,स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए


पशु के समान  बंधक बनकर
स्वीकार नहीं तुम–मुझको प्रिए..
जीवन पथ पर संशय गढ़कर 
स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए...

बहती नदिया की स्वतंत्र धार 
कल कल करते यदि आना है 
तो स्वागत है...
जीवन में मेरे तुम्हें प्रेम लिए 
बाहें खोले यदि आना है 
तो स्वागत है ...
पशु के समान  बंधक बनकर
स्वीकार नहीं तुम–मुझको प्रिए..

मै सरल ,लचीला, भाव भरा 
इक द्रवित हृदय का स्वामी हूं
विश्वास,प्रेम ,स्नेह से पोषित 
रंग सुनहला धानी हूं ...
बचा हुआ जोभी पथ  है
गर हाथ पकड़ कर निभा सको 
जीवन पथ की पगडंडी पर
यदि गिरता हूं तो उठा सको 
कलुष,कुपित , मन अधभर 
स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए...

मै कृषक के घर में जन्मा हूं
मिट्टी से रखता नाता हूं
मै कुम्हार की मेहनत पर
जो धधक सके वो आंवा हूं
 श्रृंगार तुम्हीं से है मेरा
गर छमता है श्रृंगार करो
तुम बढ़ो तुम्हारा स्वागत
हृदय बसों विस्तार करो
तृष्णा तो केवल तृष्णा है
सूखी तृष्णा गर मिटा सको 
मै चाक की गीली मिट्टी सा
तुम मूर्तिकार आकार भरो..
विचलित ,विवश,शक्ति विहीन
स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए...
जीवन पथ पर संशय गढ़कर 
स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए..
आमोद बिंदौरी मौलिक/अप्रकाशित 



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