आखिर क्या है ये???
मैं उँगलियाँ पकडे हूँ .. वो खिंच रहा है .. वो तेज चल रहा है घसीट रहा है .... ये इसको देखो , ये उसको समझो थोड़ा तेज चलो , बोल रहा है ... न सुख है , न दुःख है न हर्ष है ...न प्यास है न भूख है , न लालसा न...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है