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आदमीं हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ खुदा

2122-2122-2122-212 मतला:- ख़ुश ही रहता हूँ शिकायत क्या करूँ क्या है अता।। आदमी हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ ख़ुदा।। हुश्न-ए-मतला:- तेरे ज़ानिब से मुझे जो भी मिला अच्छा लगा । मैं तो मुफ़लिस था मेरी ...