गजल ....चाँद तारों से कभी पूंछा नही
गजल ...चाँद तारो से कभी पूंछा नही Posted by amod bindourion August 18, 2015 at 11:00pmView Blog 0 बहर -2122/2122/2122/212 ---------------------------------------------- आज हम यह सोचते है के बिछड़ कर क्या मिला हाँ ये सच है जो मिला उसका अलग रस्ता मिला ----------------------------------------------- सोचता हूँ चाँद तारों से ज़रा मै...