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मार्च, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई..

2121-212-2121-212 सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई।। ख़ैरख्वाह वो बने,खैर-ख्वाही' की गई।। मुद्दतों के बाद  गर जो यूँ बात की गई।। खामियां जता के ही गात फिर भरी गई।। गर दो'-आब की पवन,रोंक लें ये खि...

इक फासले और दायरे से बंधा

वो मुझसे  वास्ता नहीं रखता । वो मुझसे दूर भी नही रहता ।। वो दस्तक देता है हवा की तरह खटखट की दरवाजे पर .. उसका अहसास बता देता है की वो यही है कही पर मेरे आस पास .. वो नाम बदल लेता है .. ...

कोई ऐसे रूठता है क्या??

  कोई रोकने लगा है क्या  ??? कोई राज भी छिपा है क्या??? तेरा फोन अब नहीं आता!! कोई और मिल गया है क्या ?? मुझे गैर कह दिया तुमने!! मेरा वास्ता बुरा है क्या ?? मेरे रूबरू नहीं रहते!! मेरा साथ ब...

मन भी कितना आतुर है

22-22-22-2 मन भी कितना आतुर है।। ज्यूँ सबकुछ जीवन भर है।। पशुओं  कि यह हालत भी। इंसानों से बेहतर है।। लोक समीक्षा इतनी ही। जितना चिड़िया का पर है।। मेरा मेरा मुझको ही। छाया है सब छप्...

तूने आखिर ये खत लिखा कैसे

[3/16, 6:32 PM] 2122-1212-22 जब मुहब्बत नहीं वफ़ा कैसे।। तूने आखिर ये ख़त लिखा कैसे।। तूम मुझे भूल भी नहीं पाते। रोग इतना बड़ा लगा कैसे।। रात यादों से अब नहीं कटती। राज इतना बड़ा खुला कैसे।। रौशन...

मन की' मनमानी को ठुकराने लगे हैं

2122-2122-2122 वक्त से दो चार हो जाने लगे हैं। मन की मनमानी को ठुकराने लगे हैं।। अब जो अरमानों को टहलाने-लगे* हैं।।(बहाने बाजी करना) जिस्त की सच्चाई अपनाने लगे हैं।। उम्र की दस्तक़ जो है च...

जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन

शीत जैसी चुभन, आग जैसी जलन।। जाने क्या कह रहा है मेरा आज मन।। इक कशिश पल रही है हृदय में कहीं। कश्मकश चल रही , साथ मेरे कोई।। डुबकियां ले रहा ही मेरा आज मन।। इस कदर है अधर से अधर ...

हक़ दोनों बइमानी समझें

22-22-22-22 नैहर जो  नादानी समझे।। पीहर कारिस्तानी समझे।। मां जो सब शैतानी समझे।। पी घर एक कहानी समझे।। मेरे दिल में क्या था क्या है। कुदरत का रंग धानी समझे।।   हैं आंसू सागर से मेर...

मैं वक्त कहाँ कब रुकता हूँ

22-22-22-22 मैं कुछ और कहाँ कहता हूँ।।   गैरों से लिपटा  - अपना हूँ।। वैमनष्यता न सर उठा पाए। दुश्मन की तरहा रहता हूँ।। दरपण भी छू सकता है क्या। बस ये ऐसे ही -    पूछा हूँ। कलियाँ खुशबू ब...

सच की झूठी जिल्दकारी क्या कहूँ

याद आती है तुम्हारी क्या कहूँ । छाई रहती है खुमारी  क्या कहूँ। अब नहीं चलता , मेरे पे बस मेरा।   बढ़ रही नित बेक़रारी क्या कहूँ।। खुद मुआफ़िक आयत ए कुरआन हो। इसमें अच्छी अर्श कार...

कोई उम्मीद का सूरज कहीं पर है खड़ा सायद

जो नजरें अब तलक बेख़ौफ़ दौड़ी जा रहीं हैं यूँ।। कई आशाएं तपती रेत को खंघला रहीं हैं यूँ।। कोई उम्मीद का सूरज , कहीं पर है खड़ा सायद। पहल की  किरने ये पैग़ाम लेकर आ रहीं हैं यूँ।। ये ...

अहसास होगा याद अगर करते हैं

2212-22-1122-22 अहसास होगा याद अगर करते हैं।। आती है क्यूँ चाहत, के क्यूँ घर करते हैं।। इस आस से की कल कुछ अच्छा होगा। हम लोग इक दिन और सफर करते हैं।। मैंने भी अक्सर नाम लिये बिन लिख्खा।   ज...

आग हो तुम ..

आग हो तुम मुझे जला दोगे।। यार उल्फत की यह सजा दोगे।। मेरी आँखों में झांक कर देखो। इतनी उल्फत है की सब भुला दोगे।। तुम खयालो में रोज आती हो। कैसे कहती हो के भुला दोगे।।। किन च...