हक़ दोनों बइमानी समझें
नैहर जो नादानी समझे।।
पीहर कारिस्तानी समझे।।
मां जो सब शैतानी समझे।।
पी घर एक कहानी समझे।।
मेरे दिल में क्या था क्या है।
कुदरत का रंग धानी समझे।।
हैं आंसू सागर से मेरे।
सब जिनको बस पानी समझे।।
क्यों बेटी रोई पीहर में।
जननी बात कहानी समझे।।
हूँ नैहर बागां की खुशबू ।
पी घर जहर ख़ुर'आनी समझे।।
नैहर पीहर कहने को दो।
हक़ दोनों बईमानी समझे।।
उनका बेटा ,बेटा उनका।
बेटी किसको मा'नी समझे।।
आमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित
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