तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे

सांस की जब सरगम बदले 
और आंख बिना मतलब रो ले
हम दोनों की बात हो जाए 
बिन चमड़े की जुबां डोले 
 तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे–1

नंगे पैरों तपती धरती 
का पथ शीतल नम्र लगे 
हाथ अगर हो हाथों में तो
सागर पर्वत क्षम्य लगे 
तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे–2

 विपदाएं आएं जीवन में
रच कर के कितने ही रंग 
कहां अकेले भिड़े पड़े हो
जब तुम बोलो बैठो संग 
…तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे–3

पारिवारिक परिचय यदि हो
तो नाम तुम्हारे बाद आए
सांसारिक जीवन की गति
में सदा तुम्हारी याद आए
…तब मानूंगा …प्रेम है तुमसे–4

कहने को ,कुछ भी कह दूं
अंतिम निष्कर्ष तुम्हारा हो
संकल्प कोई करने बैठूं यदि
तेरे हाथ जल धारा हो 
…तब मानूंगा …प्रेम है तुमसे –5

आमोद बिंदौरी 21/07/25

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