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दो गजलें

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बहर 122/122/122/122 निगाहे नशा बेख़बर देखते है/ तुम्हे आज कल आँख भर देखते है// तुम्हारी अदा से जिधर देखते है/ मुहब्बत का अपने नगर देखते है// रूमानी है आबो हवा यार तेरी/ भरी बज्म में भी हुनर देख...

दस्तूर

कविता अजीब समन्दर है ये यहाँ तो मछली ही मछली को खा रही है!!!!!!! इस परिवेश में मैं भी खुद को बचाता हूँ और दूसरों को खा जाता हूँ!!!!!! क्या करूँ????? रास्ता सुझाना बदलाव* है// वक्त लगेगा/ तख्त...

एक पल भी मेरा न हो फालतू

बहर 212/212/212/212 हम नसीं साथ  बैठो करें गुफ़्तगू/ जिंदगी से भी होते रहें रु-ब-रु// आइना है तू मेरा बता हाले दिल/ खुल के कह दो छिपाते नहीं आरजू// चाँद अपनी सुनाओ सुनो कुछ मेरी/ सबसे प्यारा खिल...

ये कश्ती मेरे जीवन की

कविता ये कश्ती मेरे जीवन की क्यों डूब -डूब सी जाती है... मैं बाँध -बाँध के आता हूँ वो छूट -छूट सी जाती है..... हैं नाटक बड़े अजीबों इसके न समझूँ तो समझती है.. जीवन का हर क्षण गिन लेती है फि...

बचपन मधु कुटुंब

बचपन .... एक योद्धा होता है...... जो दर्द ..गम/ को सदैव धरासाई रखता है / ये उस मधुमख्खी की तरह है जो / ग्रीष्म की तपती धरती पर भी/ ख़ुशी का मधु / अपने छत्ते (कुटुंब) बरक़रार रखता है / इस मधु का स...

लो आई शाम

बहर 1212/1122/1212/22 लोआई शाम फिज़ाओं में कैफ छाया है// हरएक रिन्द के चेहरे पे नूर आया है// रकीब आज मुहब्बत ही कट -घरे में है/ खुदा या प्यार को किसने नजर लगाया है//1// पढ़ा लिखा भी गवांरों में गिना जा...

वजूद इश्क में मेरे मेरा ही साया है

बहर 1212/1122/1212/22 उजाला ज्ञान का हमने यही पे पाया है// हरएक रिन्द के चेहरे पे नूर आया है// पढ़ा लिखा भी गवांरों में गिना जाता है/ किताब ज्ञान ने मुझको यही सिखाया है//1// रकीब आज मुहब्बत ही काट घर...

मेरे महबूब के आमद का जलवा

बहर 1222/1222/1222/1222 मेरे महबूब की आमद का जलवा खूब सूरत है// जहाँ में रंग है जितने वो उतना खूब सूरत है// मजे की बात है यारों कोई तारा नही वैसा/ फलक पर आज का महताब जितना खूब सूरत है/1/ चलो अब चाँद तु...

मैं भी समझु की बेवफा क्या है

बहर 2122/1212/22 इश्क अपना बता पता क्या है/ जानना है की माजरा क्या है// लेके अपनी गिरफ्त में मुझ को/ आज जाहिर भी कर वफ़ा क्या है// जो पतिंगे उड़े ,जले जिन्दा/ रौशनी में एसा धरा क्या है// यार मैदा...

कुमुदनी फूल है हर रंग इसका

बहर 1222/1222/122 पहेली सा नही हल हो सकेगा। ये जीवन है कई बाते कहेगा।। कुमुदनी फूल है हर रंग इसका। थपेड़े लू के ये खिलकर सहेगा।। नहीं मंजूर होगा गम से रिश्ता। ख़ुशी के रंग ये जीवन भरेगा।।...

मुझको वफ़ा मिले

बहर 221 2121 1221 212 क्या खूब जिंदगी है इसे काफिला मिले। मुझको मेरी वफाओं की कुछ तो दुआ मिले।। तालीम ली है मैने मुहब्बत की प्यार की। चाहत यही है की कोई मुझे आपसा मिले।।1 जिनके ह्रदय है टू...

ला दे.....गजल

बहर :- 122/122/122/122 हमें प्यार पहलू तू फिर से पढ़ा दे न चुप बैठ ऐसे हदें सब मिटा दे तकिया नकूशी रिवाजे बुझा के तू मजहब भुला प्यार दीपक जला दे मेरे गांव की तंग गलियों में उनसे मेरा आमना सामन...

जीवन संघर्ष

कभी कभी ये समाज में मैं पल पल मरता दिखाई देता है घुटन होती है इस झूठ और सच की हिंसा से..... और मन अहिंसा वादी बन सोच बैठता है क्यों न कोई नयी दुनियाँ ढूंढ लू कोई नया ग्रह जहाँ शांत...

दर्द खामोशियों

दर्द खामोशियो में दर्द खामोशियों में लिखूंगा तुम्हे गर मुनासिब हुआ तो सिउँगा तुम्हे याद हर एक पन्ना किताबां बना मैं जिगर में हमेशा रखूँगा तुम्हे मैंकदों से नहीं है मेरा...

नशा भी करना जरुरी है जीवन में

नशा भी जरुरी है जीवन में.... नशा मुझे करना है जीवन में सद्भाव का प्रीत और प्यार का नशा मुझे करना है नए जीवन राह का नशा जो मिटा दे .... धर्म और जाति को नशा जो कर दे एक राष्ट्र को... नशा जो ...

माँ की यह देन...

माँ की यह देन कलम मेरी नित दौड़े माँ के आँगन में... खनके यह किसी धरोहर सी बच्चों की तरह मुस्कान भरे नतमस्तक हो गुरुजन चरणों ह्रदय में प्रीत का ज्ञान भरे.... सेवक हो लोक धर्म की औ सा...