मैं भी समझु की बेवफा क्या है

बहर 2122/1212/22

इश्क अपना बता पता क्या है/
जानना है की माजरा क्या है//

लेके अपनी गिरफ्त में मुझ को/
आज जाहिर भी कर वफ़ा क्या है//

जो पतिंगे उड़े ,जले जिन्दा/
रौशनी में एसा धरा क्या है//

यार मैदां में जो नही  उतरा/
क्या वो जाने मुकाबला क्या है//

ऐ खुदा इश्क दे ,मुझे अपना/
मैं भी समझूँ की  बे-वफ़ा क्या है//
मौलिक /अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी

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