तुम कब लौटोगे
अनायास की उलझान लेके जीती हूँ मे जीवन लेके आश लगाए नजरे पनघट हवा के झोके उपवन लेके गौरैया हर प्रभा को आँगन झोंझ बनाए किरणे लेके आँख लगाए खड़ी मे रहती दरवाज़े पर प्रियतम लेके ...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है