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जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उन्हें शिकायत है

उन्हें शिकायत है और वो अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार खड़े हैं। वो चाहते है तोड़ मरोड़ के कुछ नए नुश्खे.. व्यंग, जो अतीतपर गाण्डीव, सुदर्शन,  जैसे प्रहार पीड़ा, वेदना, व्यवहा...

कोई खुश्बू ही बिखराओ गुलाबों की तरह

1222-1222-1222-12 चलो हमदर्द बन जाओ, ख़यालों की तरह।। कोई खुश्बू ही बिखराओ गुलाबों की तरह।। बहुत थक सा गया हूँ जिंदगी से खेल कर। कजा आगोश में भर लो दुशालों की तरह।। मुझे बंजर में नफरत से कही...

मेरे घर का उजाला बन के मुझमे कौन रहता है

बता हर सिम्त तेरा बनके मुझमें कौन रहता है।। तुझे लेकर अकेला बनके मुझमे कौन रहता है।। अगर अब मुस्कुराते हो मेरी जद्दोजहद से तुम। तो बोलो आज तुम सा बनके मुझमें कौन रहता है।। ...

अल्फाज

मेरी कलम से:- तुम मेरी मुहब्बत को बड़ी गौर से पढ़ते हो ! वो मुहब्बत जो तुम्हें रास ही न आई.. मत ढूढ के तेरा ज़िक्र न इन किताबों में! ये तो बस ख्याल है ..तू तो पास ही न आई ... 08-01-2019अमोद