अल्फाज

मेरी कलम से:-
तुम मेरी मुहब्बत को बड़ी गौर से पढ़ते हो !
वो मुहब्बत जो तुम्हें रास ही न आई..
मत ढूढ के तेरा ज़िक्र न इन किताबों में!
ये तो बस ख्याल है ..तू तो पास ही न आई ...
08-01-2019अमोद

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