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फ़रवरी, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वक्त

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वक्त चलता रहा , हम चलते रहे ठोकरे लगती रही , गिर जाते रहे हौसले हमको , हरदम उठाते रहे रेत तपती रही, काँटे चुभते रहे                              वक्त चलता … आँधियाँ आती रही, मुस्...

लौट ही आना था

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आख़िर लौट ही आना था परछँइयों के पीछे जो भाग रहा था वो हवा के साथ चल रही थी और मैं …कदम दर कदम लोगों ने मेरे तोहफ़े गैरत से फेके तोहफे…आख़िर लाश बन गये ये समाज तमाशा बनाता रहा हम तम...