वक्त
वक्त चलता रहा, हम चलते रहे
ठोकरे लगती रही , गिर जाते रहे
हौसले हमको ,हरदम उठाते रहे
रेत तपती रही, काँटे चुभते रहे
वक्त चलता …
आँधियाँ आती रही, मुस्कुराते रहे
जिन्दगी बदलती रही , किनारे छूटते रहे
आँख भरती रही , बह जाती रही
शम्मा जलती रही , राह दिखाती रही
वक्त चलता रहा…
पल गुजरते रहे , दिन गुजरते रहे
तारीखे चलती रही, कलेण्डर बदलते रहे
जख्म खाते रहे , सहलाते रहे
हिम्मत बिन्दौरी , नितदिन जुटाते रहे
वक्त चलता रहा …
मंज़िल मालूम न थी , रास्ते मालूम न थे
ग्यान ज्योति शम्मा , जलाती रही
गुरु बनाते रहे , शिस्य बनते रहे
अपनी खामियों की , बाद लगाते रहे
वक्त चलता रहा …
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