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अरे हम कोई लेखक थोड़ी हैं

अरे ! हम कोई ,लेखक थोड़ी हैं।। बह्र:- 1222-1221-22 अरे ! हम कोई लेखक थोड़ी हैं।। समय हो पास , वो मुमफली हैं।। कहाँ कहना हमें मंच-कविता। बहल बस दिल ही जाएं ख़ुशी हैं।। बड़े ओहदे ,रंगीं रात ,ना ना। गर...

बस यू ही

कभी साधक समर्पित थे  कविता की रचना पर। मगर अब मंच पर ये कविताएं समर्पित है।। कभी अहसास होती थी ये कविताएं दिलो का अब। हो जिसकी जो समझ ,समझे वो उतना मूल्य कविता का। हैं वो अब कव...

वो कहते हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला

वो कहते हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला बह्र-1222-1222-1222-1222 वो कहतें हैं मेरी पहचान को मिटटी में मिला डाला।। मैं कहता हूँ पुरानी थी नया रिश्ता बना डाला।। न भूला कर की रिश्ते में म...

मुझे है भला क्या कमी जिंदगी से

बह्र- 122-122-122-122 मुझे है भला क्या  कमी जिंदगी से।।   है रिश्ता मेरा तीरगी ,रौशनी से।। मुझे बज्म इतना न पहचां रही है। है पहचान मेरी-तेरी माशुकी से।। कई बार गुजरे हैं तेरे शह्र से। तेर...

उनकी नजरों में सौदा अलग है

  बह्र--2122-1221-22 उनकी बातों में चहरा अलग है।। आज बातों का लहजा अलग है।। ओर कोई क्या उन्हें मिल गया है। उनकी नजरों का सौदा अलग है।।   वो मेरे अब नहीं  लग रहे हैं। लब में लहजों के लहजा अ...

मेरी यादें

बुजुर्ग सजर आज खाना पानी बंद कर चूका है पूरी जिंदगी के हर झापेड़े सह कर भी चुप चाप है आँख खुली है साँस प्रवाह मंद है इक नदी के समान जो हिमालय की ऊचाई से उपज कर दुरगम रास्तों से ...