अरे हम कोई लेखक थोड़ी हैं
अरे ! हम कोई ,लेखक थोड़ी हैं।। बह्र:- 1222-1221-22 अरे ! हम कोई लेखक थोड़ी हैं।। समय हो पास , वो मुमफली हैं।। कहाँ कहना हमें मंच-कविता। बहल बस दिल ही जाएं ख़ुशी हैं।। बड़े ओहदे ,रंगीं रात ,ना ना। गर...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है