अरे हम कोई लेखक थोड़ी हैं
अरे ! हम कोई ,लेखक थोड़ी हैं।।
बह्र:- 1222-1221-22
अरे ! हम कोई लेखक थोड़ी हैं।।
समय हो पास , वो मुमफली हैं।।
कहाँ कहना हमें मंच-कविता।
बहल बस दिल ही जाएं ख़ुशी हैं।।
बड़े ओहदे ,रंगीं रात ,ना ना।
गरीबां का निवाला, सही हैं।।
मुहब्बत में हमारी भी दोस्त।
नशा भी वो ,वही मयकशी हैं।।
कोई रूठे तो रूठे मेरा क्या।
मेरी दौलत ओ शोहरत नही हैं।।
आमोद बिंदौरी /मौलिक अप्रकाशित
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