मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं
बह्र- 2122-2122-2122-212 ज्यों हवा दस्तक करे खटखट कोई होता नहीं।। मैं बहुत कुछ सोंचता रहता हूँ पर कहता नहीं।। इस तरह परछाई सा महसूस होता वो मुझे। जैसे कोई दरमियाँ अपने है पर दिखता नहीं।। ...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है