शे'र लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा
बहर :- 2122-2122-2122-212 ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा ।। शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।। अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर । दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।। हाँ खुम...
जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है