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शे'र लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा

बहर :- 2122-2122-2122-212 ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी  हो जाएगा ।। शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।। अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर । दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।। हाँ खुम...

मुमकिन है मुहब्बत की हर बात मुहब्बत से

२२१-१२२२-२२१-१२२२ मुमकिन है मुहब्बत की हर बात मुहब्बत से।। जाहिर तो करो तुम कुछ जज्बात मुहब्बत से ।। कुछ दिन जो ठहर जाते वीरान नहीं होते । मे'रे' गीत ग़जल मुक्तक नग्मात मुहब्ब...

यही प्रेम है !!

#यही_प्रेम_है !! कई सालों का फासला यूँ तय करना जैसे कुछ हुआ ही नही न मेरी उम्र ने मुझे निचोड़ा न उसके हुश्न ने उससे फासला किया .. एक अभिव्यक्ति जो दोनों जेह्नो को मसल सी गई जिनका परिचय सिर्फ .."गलतहै " ..कह के हुआ नहीं उसकी नजर ..मुझ में पड कर ठहरती नहीं है । न मेरे सहरा में उसकी नमी बची है .. आप ऐसा मानते हैं ...ये समाज ऐसा मानेगा लेकिन रेत जानती है ..जल का संरक्षण करना .. .सहरा जनता है नमी को छिपा के रखना.. बस शर्त इतनी है ...सांसे न साथ छोड़े .. जीवन के मूल्य जिनका निर्धारण ..आप करते हैं । उनसे संघर्ष रहेगा ...इन विचारों का हर दौर में ये  बाते मुँह उठायेगी .. अलग अलग नाम , रंग, तर्क लेकर यही जीवन संघर्ष है ...यही प्रेम है आमोद बिन्दौरी

उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया ।।

एक दिन उसने मेरी खामोशियों को रख दिया ।। मेरे पेश-ए-आईने मे'री' हिचकियों को रख दिया ।। तोड़ बंदिश हिज्र -ए-दिल ख़ुल कर  युँ रोया इक दफा। उसने दिल के सामने जब चिट्ठियों को रख दिया ।...