शे'र लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा

बहर :- 2122-2122-2122-212

ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी  हो जाएगा ।।
शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।।

अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर ।
दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।।

हाँ खुमार -ए-इश्क है बातें तो होगी रात दिन ।
जब भी उतरेगा ये सर से मयकशी हो जाएगा।।

उसके हक़ में है सियासत देखना तुम एक दिन।
जाने वो बोलेगा क्या क्या औऱ बरी हो जायेगा।।

दर्द-ओ-गम शुहरत मुहब्बत सब मिलेगा इश्क में ।
इश्क कर के देख तो...खुद जौहरी  हो जाएगा।।

आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशित

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