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जिंदगी एक होशियारी है

२१२२-१२१२-२२ चाक दमन की रह-गुजारी है। जिंदगी   एक   होशियारी है। आप बीती कहूं की चुप बैठूं। बाद कुछ पल ही मेरी बारी है। . वो जो आँखें चुरा रहा मुझसे। उसकी आँखों में इक ख़ुमारी ह...

प्रतिबिम्ब

(प्रतिबिम्ब ) मै  उस दिन उन आंखों में बहुत कुछ तलाश रहा था जैसे  कोई विश्वास ... जो कमजोर हो रहा था या कोई झूठा वादा....... जो किसी  कल के लिए किया गया हो अतीत और वर्त्तमान के तराजू में  ...