जिंदगी एक होशियारी है

२१२२-१२१२-२२

चाक दमन की रह-गुजारी है।
जिंदगी   एक   होशियारी है।

आप बीती कहूं की चुप बैठूं।
बाद कुछ पल ही मेरी बारी है। .

वो जो आँखें चुरा रहा मुझसे।
उसकी आँखों में इक ख़ुमारी है।

बेवफ़ा कह के मुँह घुमाने  दो।
उसका हक़ भी है, पर्दा-दारी  है।

किससे कितनी सहूलियत बरतें।
लोक नज़रों का वार भारी है।

साथ मेरे रहे या दूर कहीं।
फ़िक्र उसकी युँ ज़ीस्त वारी है।

ख़ुद ही कहना युँ ख़ुद ही हँस लेना।
आज कल मेरी ये बिमारी है।

दफ़्न ख़ुद कर लो ये कहाँ होगा।
इश्क होना ही इश्तियारी है।।

ख़ुद ही ग़र दस्तरस में आया वो।
सोंच लूंगा उसे बिमारी है।।

मैं अदब सीख के करूँगा क्या ।
जीत की शर्त  जब अय्यारी है।।

आमोद बिन्दौरी ..मौलिक

टिप्पणियाँ