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कमी नही होती.....

आग जो तब लगी नही होती प्यार की अब कमी नही होती लौट जाता बुरा समय  है जो आज कोई  कड़ी नहीं होती जिंदगी की नही रही कीमत साँस चलती रुकी  नही होती बेंच  डाला  दरों इमां  जो था घर दिवाले पड़ी नही होती आँख रोती न हो खुली हो कर मुस्कराहट कमी नही होती.... दर्द है जिंदगी  मुझे कल का प्यार अब बन दगी नही होती मह फिला है अंदाज  बोलूँ तो सादगी पर  कड़ी नही होती खूब सूरत है तू कहा की है शायरी हम नसीं नही  होती बाग़ बीरान  है  उसी का है रोष की जिन्दगी  नही होती अब मिलन का रहा  जहा प्यासा प्यास की तय घडी नही होती आख का हो  नही न कोई तो आँश वरसा झड़ी नही होती अन कहा ही कहो कोई वादा रात वैसी बड़ी नही होती जा कही दफ्न कर है जो वो है  रौशनी कम कभी नही होती मुकदर  का खेला खेला जो है हार माला चढ़ी नही होती..आमोद बिन्दौरी

गजल ... रोज मरने का फायदा क्या है

आज हमने एक गजल लिखी है बहर के दायरे में रह कर । आप का आशीर्वाद चाहिए खिदमत में हाजिर है... दूर रह के हमें मिला क्या है। आज कहने दो कायदा क्या है।। मौसमो की जुबनियाँ सुन लो। कह रहा ...

पसीने का एक बूंद

पसीने काबूंद माथे से उपज ठिठकता /चलता या बहता निचे की ओर रुख और अधरों का सरोकार करते हुए चुमते/बिदा लेते/रु-बरु आ पहुचा  ... ह्रदय के पास मन में अंगड़ाई ले कहने लगा मुझे कबूल कर ल...

जिंदगी बस

पता नही ये गजल है भी या नहीं ...फिर भी जो लिखा पेश है। बस ऐसे पढ़ लीजिए ज्यादा खास नही है.... जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई प्यार की सब किताबे धरी रह गई रोज मिलते रहे दर्दों गम हर गली ज...

पसीने का एक बूंद

एक पसीने की बूंद माथे से उपज ठिठकती /चलती/बहती निचे की ओर रुख और होठों का सरोकार करते हुए चुमते/ सबसे रु-बरु होते चलती गयी चलती गयी गुदगुदी करते मचलते... आ पहुची ... ह्रदय के पास म...

आलोचक संघर्ष...

एक आलोचक ने तोड़ दी सारी हदे कविता को खड़ा कर दिया चौराहे पर केले के छिलके सा उतार डाला उसके जिस्म का एक एक कपडा जंगली जानवर सा नोच डाला उसका तन.. मृत हो गयी मेरी एक और कविता इस सं...