पसीने का एक बूंद
एक पसीने की बूंद
माथे से उपज
ठिठकती /चलती/बहती
निचे की ओर
रुख और होठों
का सरोकार करते हुए
चुमते/
सबसे रु-बरु होते
चलती गयी
चलती गयी
गुदगुदी करते
मचलते...
आ पहुची ...
ह्रदय के पास
मन में अंगड़ाई ले
कहने लगी:-
मुझे कबूल कर ले
बस यहीं ठहर जाउंगी....
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें