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असमंजस आज नही है ....

लेकर जिज्ञासु जीवन  जीता है जीता जाए  सब कर्मो का ही फल है  मानव बस चलता जाए  ना था ..जिस पर मेरा काबू  हंस कर मैने उसे छोड़ा  जीने की ख्वाहिश ही ऐसी  था जो जैसे वैसे मोड़ा  असमंजस आज नही है  के जीवन रूखा जाए  सब कर्मो का ही फल है  मानव बस चलता जाए –१ श्रम करती चींटी देखी  देखा है श्रम चिड़िया का  कोयल की. फीकी बातें टिड्डा बस बान लगाए  अपनी अपनी है करनी  प्राणी क्यों शोर मचाए  सब कर्मो का ही फल है  मानव बस चलता जाए –२ पल भर के इस जीवन से हर रंग भला ही जानो  गर हरी घास है जीवन  खुद बीर बहूटी मानो चढ़ता सूरज भी अपना हो सांझ तो यूं झुक जाए  सब कर्मो का ही फल है  मानव बस चलता जाए –३ कम कीमत में क्रय करना  बेचे है दुगना भाव  बनिया है वो जीवन का   है ऊंच नीच का ताव  उसके आगे नहि चलती ना क्षण इक मोल दिलाए  सब कर्मो का ही फल है  मानव बस चलता जाए –4 आमोद बिंदौरी