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आप को प्रणाम

आज कुछ अमने सामने मुझे ऐसा लगता है  कि ये जो हमारा रिस्ता है  धूल कुछ जादा जम रही है  और कुछ दीमक भी चट रही है या मे यूँ कहूँ मे एक बेकार आदमी हूँ  जो आप का समय बर्बाद कर रहा हूँ तो मेरे बिचार से …किया जाय झूठ के गारे की इमारत का कोई वजूद नहीँ  मे बेहद नकारात्मक विचारों से घिर रहा हूँ आपने विचारों को सकारात्मक  कर के इस नतीजे पर हूँ आप को प्रणाम

न पूछता है.. कोई आज यूँ पता मेरा...गजल

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मेरे अतीत मेँ जाकर के जिन्दगी मुझसे॥ क्योँ चाहती हो मेरा प्यार,दोस्ती मुझसे॥ न पूछता है.. कोई आज भी पता मेरा॥ तमाम शहर मिले, तुम हो अजनबी मुझसे॥ बुझा चिराग हूँ, आखिर मजार सूनी है। मेरी हयात न पूछो ये मुफलिसी मुझसे॥ जो तिनका तिनका सँजोए हैँ ख्वाब जीवन भर॥ क्योँ छीनते हैँ वही ,लोग ये खुशी मुझसे॥ है ख्वाब दिल का मुहब्बत मेँ साथ होँ हम तुम। इसे अतीत ने रख्खा है अजनबी मुझसे॥. मौलिक /अप्रकाशित आमोद बिँदौरी