न पूछता है.. कोई आज यूँ पता मेरा...गजल

मेरे अतीत मेँ जाकर के जिन्दगी मुझसे॥ क्योँ चाहती हो मेरा प्यार,दोस्ती मुझसे॥
न पूछता है.. कोई आज भी पता मेरा॥ तमाम शहर मिले, तुम हो अजनबी मुझसे॥
बुझा चिराग हूँ, आखिर मजार सूनी है। मेरी हयात न पूछो ये मुफलिसी मुझसे॥
जो तिनका तिनका सँजोए हैँ ख्वाब जीवन भर॥ क्योँ छीनते हैँ वही ,लोग ये खुशी मुझसे॥
है ख्वाब दिल का मुहब्बत मेँ साथ होँ हम तुम। इसे अतीत ने रख्खा है अजनबी मुझसे॥.
मौलिक /अप्रकाशित

आमोद बिँदौरी

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन पथ पर संशय गढ़कर ,स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए

अपने दुख को स्वयं निमंत्रण देता हूं

तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे