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मै आज नन्हा पेड़ मां की याद में रोपित करूं

जिसके लिए जीवन मेरा , इस श्रृष्टि से अनमोल है । मैं जो भी हूं जितना भी हूं  हर तिनका मां का रोल है । वो श्रजक है मै पत्तियां , शाखाएं , मां की आश हूं।  गहरी जड़े जिस पेड़ की  उस पेड़ का बिस्वास हूं। मां "सालू मरदा थिमक्का"  रोपित जिसे प्रति पल किया । उस प्रेम का जीवित उदाहरण , इस धरा ने है जिया ।। चहुं ओर छाई अनगिनत  बेले हरी, बट पेड़ हैं। सूरज का पहला तेज , रजनी की छिटक रट पेड़ हैं।। सब खग, विहग़ , नभचर,  पखेरू,कीट को आश्रय दिया।  पाला ओ पोसा घर दिया। बंजर धरा को भर दिया । मै आज नन्हा पेड़  मां की याद में रोपित करूं। बंजर धरा को मां की ममता  की तरह पोषित करूं।। आमोद बिंदौरी