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आज खुद को आज कहकर जानता है ।

2122-2122-2122 आज खुद को आज कहकर जानता है।। हल वो बूढ़ा सा शज़र ,पर जानता है।। किसका कितना पेट भूखा रह गया अब । घर का चूल्हा ही ये बेहतर जानता है ।। कैसा बीता है शरद और ग्रीष्म बरखा। मुझसे बेह...

क्या यही वक्त है

मैं उँगलियाँ पकडे हूँ .. वो खिंच रहा है .. वो तेज  चल रहा है घसीट रहा है .... ये इसको देखो , ये  उसको समझो थोड़ा तेज चलो , बोल रहा है ... न सुख है , न दुःख है न  हर्ष है ...न प्यास है न भूख है , न लालसा न...